लखनऊ। लखनऊ के महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ता व नागरिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने आगामी संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को उसके मूल स्वरूप में लागू करवाने की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। और इस संबंध में उन्हें क ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि महिला आरक्षण बिल 2023 में पारित हो चुका है किन्तु सत्ताधारी पार्टी अपने राजनैतिक एजेंडा को पूरा करने के लिए इस महत्वपूर्ण बिल के साथ परिसीमन व जनगणना की शर्त लगा रही है। जिसे महिला संगठन व महिला अधिकारों के प्रति जागरुक नागरिक बिल्कुल नामंजूर करते हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि महिला आरक्षण एक स्वतंत्र मुद्दा है जो महिला अधिकारों से जुड़ा हुआ है, इसे इस तरह के मुद्दों से जोड़ने के कारण 2023 अधिनियम के कार्यान्वयन में देरी होगी और साथ ही यह हमारे संघीय और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए भी एक ख़तरनाक संकेत है।
ज्ञापन में संसद के इसी मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को इसके मूलस्वरूप में पारित करने की मांग की गई जिससे आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों में भी महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित हो सकें।

सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संगठनों द्वारा दिये गये ज्ञापन पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने संसद में पहले भी 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन व जनगणना की शर्तों का विरोध किया था और आगामी मानसून सत्र में भी महिला आरक्षण विधेयक को उसके मूल स्वरूप के साथ अविलंब लागू करने की मांग करेंगे जिससे 2027 के उप्र विधानसभा चुनावों में भी महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित हो सकें। अखिलेश ने यह भी कहा कि वे राज्यसभा व एमएलसी की सीटों पर भी महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की मांग करेंगे।
आज के प्रतिनिधिमंडल में साझी दुनिया से प्रो रूपरेखा वर्मा, सपा से महापौर प्रत्याशी रहीं वंदना मिश्रा, एडवा से मधु गर्ग व वंदना राय , सामाजिक कार्यकर्ता नाइश हसन, भारतीय महिला फेडेरेशन से कांति मिश्रा, एपवा से मीना सिंह व सरोजिनी बिष्ट तथा सामाजिक कार्यकर्ता प्रो रीता चौधरी शामिल थीं । महिला आरक्षण के मुद्दे पर महिला संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विगत दिनों भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय तथा आप पार्टी के राष्ट्रीय नेता संजय सिंह से भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। सभी विपक्षी दलों के नेतृत्व ने महिला आरक्षण 2023 को लागू करवाने की आवाज़ संसद में बुलंद करने का आश्वासन दिया है।
विदित हो कि राष्ट्रीय स्तर पर हर राज्य में यह मुहिम चलाई जा रही है। इस मुद्दे पर महिला संगठनों द्वारा मानसून सत्र के दौरान संसद के बाहर लगातार धरना दिया जायेगा।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)